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प्रबंध निदेशक का सकारात्मक दृष्टिकोण

दौसा जिला भौगोलिक, सामाजिक व राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होने के कारण हम सभी का दायित्व और अधिक बढ़ जाता है कि राजस्थान राज्य की राजधानी के निकट बैंक के माननीय सदस्यों व ग्राहकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरे।

दौसा जिले के अधिकांश भाग में से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या - 11 का गुजरना, मेहंदीपुर बालाजी का प्रमुख तीर्थधाम, आभानेरी, भांडारेज जैसे पर्यटन स्थलों के साथ-साथ काश्तकारों द्वारा दोनों फसलें भरपूर मात्रा में लेने के कारण बैंक के पास अमानत संग्रहण से लेकर ऋण वितरण के विविध मार्ग खुले हुए हैं। गठन के पश्चात् बैंक द्वारा आपके सहयोग से उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं।

वर्तमान में केन्द्र सरकार प्रवर्तित पैक्स कम्प्यूटरीकरण योजनान्तर्गत वर्ष 2025-26 के दौरान जिले की ग्राम सेवा सहकारी समितियों का पूर्ण कम्प्यूटरीकरण प्रक्रियाधीन है। जिले की कुल 268 सदस्य ग्राम सेवा सहकारी समितियों में से 194 समितियों को ई-आर-पी- सॉफ्टवेयर पर गो-लाईव कर दिया गया है। शीघ्र ही जिले के समस्त सदस्य किसान अपनी पैक्स पर ही सीबीएस सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में सक्षम होंगे।

बैंक की सभी बैंक शाखाएँ एवं प्रधान कार्यालय वर्ष 2013-14 से सी-बी-एस- प्लेटफॉर्म पर कार्यरत हैं तथा बैंक द्वारा आर-टी-जी-एस- / एन-ई-एफ-टी- / रुपे ए-टी-एम- कार्ड / रुपे डेबिट कार्ड / एन-ए-सी-एच- / डी-बी-टी-एल- / एस-एम-एस- अलर्ट / ई-मेल स्टेटमेंट जैसी सी-बी-एस- सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है। अब बैंक क्षेत्र के अनावधिपार के-सी-सी- खाताधारकों को पूर्व की भांति बैंक शाखाओं के बाहर अल्पकालीन फसली ऋण लेने हेतु लम्बी-लम्बी कतारों में नहीं लगना पड़ता है। किसान अपनी क्षेत्रान्तर्गत पैक्स पर जाकर 'FIG (Financial Inclusion Gateway)' सॉफ्टवेयर पर बायोमैट्रिक ट्रांजेक्शन कर फसली ऋण जमा करवा सकता है तथा नवीन फसली ऋण भी आहरित कर सकता है। इसके अतिरिक्त रुपे किसान कार्ड के माध्यम से अपने घर के नजदीक किसी भी बैंक के ए-टी-एम- से राशि निकाल सकता है।

दौसा जिले में समग्र सहकारी विकास परियोजना के माध्यम से सभी सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्राप्त हो चुकी है। बैंक में CKYCR लागू हो चुका है। समस्त खाताधारकों के डाटा को CKYCR मापदंडों के अनुरूप कर शाखाओं को CKYCR पर लाईव किया जाकर CKYCR को डाटा भी भिजवाया जा रहा है।

राज्य सरकार एवं शीर्ष सहकारी बैंक के निर्देशानुसार जिले की सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों को कॉमन सर्विस सेन्टर (सीएससी) के रूप में पंजीकृत किया जा रहा है। जिले की 142 पैक्स वर्तमान में सीएससी के रूप में कार्यरत हैं। जिससे ग्राम सेवा सहकारी समितियों की अन्य आय में वृद्धि होने के साथ-साथ आम-जन को समिति स्तर पर 300 से अधिक सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। इस वर्ष समस्त पैक्स को 'ई-मित्र कियोस्क' के रूप में भी पंजीकृत करवाकर उनकी आय में वृद्धि करवाये जाने का लक्ष्य है।

राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप बैंक क्षेत्र की 33 पैक्स में 'कस्टम हायरिंग केन्द्र' प्रारम्भ किये जाकर इन पैक्स की अन्य आय में वृद्धि के सार्थक प्रयास किये गये हैं। 40 अन्य पैक्स में वर्ष के दौरान 'कस्टम हायरिंग केन्द्र' प्रारम्भ किया जाना प्रक्रियाधीन है।

ग्राम सेवा सहकारी समितियों के मार्फत विविध प्रकार के ऋण देकर काश्तकार व बेरोजगार युवकों को अधिक रोजगार देने व इन्हीं समितियों के मार्फत ग्रामीण अमानतों का संग्रहण करके ग्रामीणों को अधिक ब्याज दर देने का भी बैंक का अपना लक्ष्य है, जिसके लिये आप सभी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रो. वैद्यनाथन कमेटी के निर्णयानुसार समितियों के स्वावलम्बन हेतु यह अतिआवश्यक है। इस प्रकार सभी सहकारी समितियों की व्यावसायिक विकास योजना तैयार करवाई जाकर लक्ष्यानुसार कार्य करवाया जाना प्रस्तावित है।

स्वयं सहायता समूहों एवं संयुक्त देयता समूहों के माध्यम से विशेषकर ग्रामीण महिलाओं में 'राजीविका' के सहयोग से जागृति लाकर व उन्हें स्वावलम्बन प्रदान कर सहयोग दिया जा रहा है।

मैं आप सभी के सहयोग व मार्गदर्शन की अपेक्षाओं के साथ मेरे साथी बैंक कर्मचारियों की ओर से आश्वस्त करना चाहूँगा कि बैंक के चहुँमुखी विकास के लिये हम सभी कृतसंकल्प हैं।

जय सहकार!

(शिवदयाल मीना) (R.C.S.)
प्रबंध निदेशक